विचारों का सम्मान और मानवाधिकार।

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नमस्ते मित्रों!


(pixabay free image)

इस दुनिया में सभी को अपना मत व्यक्त करने का अधिकार है। मानवाधिकार की ये पहली शर्त है। लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जो अलग मत रखने वाले को अपना दुश्मन समझते हैं। वे लोग चाहते हैं कि दूसरे केवल उनकी हाँ में हाँ मिलाएँ। लेकिन ये सोच बहुत ही गलत है। इसके कारण तानाशाही प्रवृतियाँ बढ़ती हैं। लोग सच बोलने से कतराने लगते हैं और अंततः दिमागी और राजनीतिक रूप से गुलाम बन जाते हैं।

गुलामी चाहे किसी की भी हो वह संसार की सबसे बुरी चीज है। इसलिए गुलामी का विरोध होन चाहिए। गुलामी करवाने वाला और करने वाला दोनों ही गलत होते हैं। इसलिए दूसरे के मत का सम्मान करें। अगर किसी का विचार अलग है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह व्यक्ति गलत होता है। मध्ययुग में जो scientific view रखता था उसको धर्म और समाज मार डालते थे। अनेकों लोगों की कुर्बानी के बाद आज मनुष्य को इन बेड़ियों से आजादी मिली है। इसको बेकार नहीं जाने देना है। याद रखिए, विचार व्यक्त करना केवल आजादी ही नहीं है बल्कि दूसरों के मानवाधिकार का सम्मान भी है।

धन्यवाद।



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6 comments
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I couldn't understand much, despite translation. !LADY, !LOLZ, !PIZZA

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Ha ha! This post is about the freedom of expression. !PIZZA, !LOLZ, !MEME, !LUV

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I agree with you , everyone has their own opinion. Some people remain silent for fear of being singled out, which is absurd in my opinion, but it often happens.
I think that many times it's not so much what is said, but the tone used.

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